झारखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सभी जिला उपायुक्तों (डीसी) और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों (सीजेएम) को निर्देश दिया है कि वे SARFAESI Act, 2002 की धारा 14 के तहत लंबित आवेदनों का निपटान निर्धारित समय-सीमा में करें। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने यह आदेश बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई के दौरान दिया।
क्या है मामला?
कई बैंकों (झारखंड ग्रामीण बैंक, कैनरा बैंक, यूको बैंक, HDFC बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक आदि) ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि उनके द्वारा SARFAESI Act की धारा 14 के तहत डिफॉल्टर कर्जदारों की संपत्ति पर कब्जा पाने के लिए दायर आवेदन लंबे समय से जिला मजिस्ट्रेट/मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास लंबित हैं, जिससे वसूली में बाधा आ रही है।
अदालत की क्या टिप्पणी?
अदालत ने स्पष्ट किया कि SARFAESI Act का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों को बिना अदालती हस्तक्षेप के संपत्ति पर कब्जा करने और उसे बेचने की शक्ति देना है। अदालत ने कहा कि धारा 14 के तहत जिला मजिस्ट्रेट/सीजेएम की भूमिका “मंत्रिस्तरीय” (ministerial) है, न कि न्यायिक या निर्णयात्मक। उन्हें संपत्ति के शीर्षक या हस्तांतरण की वैधता की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। बैंक का आवेदन मिलने पर उन्हें मात्र संतुष्ट होना है और कब्जा दिलाने में सहायता करनी है।
अदालत ने यह भी कहा कि इस स्तर पर कर्जदार (बोरोअर) की कोई भूमिका नहीं है और उसे सुनवाई का कोई अधिकार नहीं है। अगर कर्जदार को कोई आपत्ति है, तो वह SARFAESI Act की धारा 17 के तहत डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) का दरवाजा खटखटा सकता है।
कितने आवेदन हैं लंबित?
अदालत ने सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:
· धनबाद में सबसे अधिक 308 आवेदन लंबित हैं।
· पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) में 203 आवेदन लंबित हैं।
· रांची में 146, बोकारो में 65 और हजारीबाग में 64 आवेदन लंबित हैं।
· सीजेएम, जमशेदपुर के पास 59 आवेदन लंबित हैं।
अदालत के प्रमुख निर्देश:
- समय-सीमा का पालन: SARFAESI Act की धारा 14 के तहत आवेदन पर 30 दिनों के भीतर और विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 60 दिनों के भीतर आदेश पारित किया जाना चाहिए।
- जिला उपायुक्तों को निर्देश: जिन डीसी ने अदालत में समय सीमा देने का आश्वासन दिया, उन्हें उसी के अनुसार आवेदन निपटाने का निर्देश दिया गया:
· रांची: 6 सप्ताह
· हजारीबाग व बोकारो: 4 सप्ताह
· धनबाद व जमशेदपुर: 8 सप्ताह
· अन्य जिले: 4 सप्ताह - सीजेएम को निर्देश:
· सीजेएम, जमशेदपुर: 60 दिन
· सीजेएम, धनबाद: 30 दिन
· अन्य सीजेएम: 15 दिन - अलग रजिस्टर बनाने का आदेश: सभी डीसी और सीजेएम एक अलग रजिस्टर बनाएंगे, जिसमें आवेदन की तारीख, निपटान की तारीख और आदेश के निष्पादन की तारीख दर्ज होगी। इस रजिस्टर की समीक्षा हर 15 दिन में की जाएगी।
- सीजेएम कार्यवाही में बदलाव: सीजेएम इन आवेदनों को “क्रिमिनल मिसलेनियस” के रूप में पंजीकृत नहीं करेंगे, बल्कि इन्हें प्रशासनिक पक्ष पर “SARFAESI Applications” के रूप में दर्ज करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला:
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जिनमें Balkrishna Rama Tarle बनाम Phoenix Arc, C. Bright बनाम District Collector, और Standard Chartered Bank बनाम V. Noble Kumar शामिल हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि धारा 14 के तहत कार्यवाही में समय का विशेष महत्व है और इसमें कोई विलंब नहीं होना चाहिए।

