Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले के बरकट्ठा की एक पारा शिक्षिका को सेवामुक्त किए जाने के मामले में शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शिक्षा विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह अवैध ठहराते हुए कहा कि बिना कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) दिए और कर्मचारी का पक्ष सुने बिना नौकरी से निकालना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने सेवामुक्ति का आदेश निरस्त करते हुए शिक्षिका गीता कुमारी उर्फ गीता पांडेय को तत्काल सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है।
२० साल की सेवा के बाद बिना मौका दिए हटाया याचिकाकर्ता गीता पांडेय पिछले २० से अधिक वर्षों से बरकट्ठा प्रखंड में पारा शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। २ फरवरी २०२३ को हजारीबाग के जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) ने एक आदेश जारी कर उनकी शैक्षणिक मार्कशीट में गड़बड़ी का आरोप लगाया और उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया। विभाग ने न सिर्फ उन्हें नौकरी से निकाला, बल्कि अब तक दिए गए मानदेय (सैलरी) की वसूली का भी आदेश दे दिया था। इस एकतरफा फैसले को शिक्षिका ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
सरकार के पास नहीं था कोई जवाब सुनवाई के दौरान शिक्षिका के वकील ने कोर्ट को बताया कि इस दंडात्मक कार्रवाई से पहले विभाग ने उन्हें स्पष्टीकरण देने का एक भी मौका नहीं दिया। अदालत के पूछने पर राज्य सरकार की ओर से भी ऐसा कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किया जा सका, जिससे यह साबित हो सके कि शिक्षिका को नोटिस जारी किया गया था।
कोर्ट का रुख दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने हजारीबाग डीएसई द्वारा २ फरवरी २०२३ को जारी किए गए उस दमनकारी आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें सेवामुक्ति और मानदेय वसूली की बात कही गई थी। कोर्ट ने शिक्षिका को तुरंत काम पर वापस लेने का निर्देश दिया है, जिससे पिछले दो साल से न्याय की गुहार लगा रही शिक्षिका को बड़ी जीत मिली है।

