Ranchi : केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) रांची की 750 एकड़ जमीन आखिर कहां गई, इस गंभीर सवाल को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। पटना निवासी गुड्डू भैया द्वारा दायर इस याचिका को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया है कि 1920 में CIP के नाम पर कुल 750 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री हुई थी, जबकि वर्तमान में संस्थान के पास केवल 250 एकड़ जमीन ही बची है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में हुई। अदालत ने केंद्र सरकार, रांची के उपायुक्त तथा निबंधन विभाग को नोटिस जारी कर 8 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि शेष 500 एकड़ जमीन आखिर कहां गई।
गुड्डू भैया ने अपनी याचिका में संस्थान की जर्जर होती व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 2002 के बाद से न तो डॉक्टरों की बहाली हुई है और न ही पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य कर्मचारियों की। वर्तमान में इतने बड़े संस्थान में केवल 20 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जबकि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जानबूझकर इस गौरवशाली संस्थान को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। याचिका में यह भी कहा गया है कि CIP परिसर के भीतर जेल जैसी स्थिति है। भोजन की गुणवत्ता अच्छी है, लेकिन उसे बांटने के लिए कर्मचारियों की भारी कमी है। अदालत ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। अब 8 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान यह तय होगा कि जमीन का क्या हुआ और संस्थान की बदहाल व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। यह मामला न केवल जमीन के बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा और आम मरीजों की समस्या को भी उजागर करता है।

