
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी राज्य का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वहां बालिकाओं की सही देखभाल और उन्हें अवसर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार को बालिकाओं के प्रति संवेदनशील रहना होगा। वह शनिवार को झारखंड ज्यूडिशियल एकेडमी में आयोजित “बालिका सुरक्षा: भारत में बालिका के लिए सुरक्षित और समर्थ वातावरण” विषयक सेमिनार का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। इस आयोजन की मेजबानी जुवेनाइल जस्टिस सह पोक्सो कमेटी, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग और यूनिसेफ ने संयुक्त रूप से की।

मुख्य सचिव अलका तिवारी ने राज्य में मानव तस्करी, पोक्सो मामलों और बाल विवाह की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार नागरिक समाज संगठनों और स्थानीय निकायों के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में कदम उठा रही है। यूनिसेफ की झारखंड प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्रा ने लिंग आधारित भेदभाव, शिक्षा और स्वास्थ्य में असमानता तथा मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी हितधारकों से समावेशी माहौल बनाने की अपील की।
तकनीकी सत्रों में जस्टिस राजेश शंकर और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर जोर दिया। वहीं जस्टिस संजय प्रसाद ने बाल विवाह रोकने के लिए समुदाय आधारित जागरूकता की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर विभिन्न जिलों से आए युवाओं ने बाल विवाह, बाल शोषण और शिक्षा को बढ़ावा देने पर आधारित पैनल चर्चा की और उनके प्रयासों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में विभागीय सचिव मनोज कुमार सहित न्यायिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सीडब्ल्यू

