Ranchi News: गिरिडीह नगर निगम के मेयर पद को अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि इसी तरह के एक अन्य मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और उस पर आदेश सुरक्षित है। उस मामले में आने वाला फैसला इस याचिका को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में गिरिडीह मेयर आरक्षण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई संबंधित आदेश आने के बाद की जाएगी। गिरिडीह नगर निगम में मेयर पद को एससी के लिए आरक्षित किए जाने के खिलाफ मो. नसीम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में 65 प्रतिशत से अधिक आबादी ओबीसी वर्ग की है, इसलिए मेयर का पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए था। उन्होंने एससी के लिए आरक्षण को अनुचित बताया है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले नगर निकाय चुनाव में भी गिरिडीह में मेयर पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया था। वहीं, धनबाद नगर निगम में एससी आबादी अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद वहां मेयर पद को अनारक्षित रखा गया। इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए गिरिडीह में एससी के लिए मेयर पद आरक्षित किए जाने की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है। गौरतलब है कि नगर निगमों के वर्गीकरण और धनबाद नगर निगम के मेयर पद को अनारक्षित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई पूरी कर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। उसी आदेश के बाद गिरिडीह मेयर आरक्षण मामले में आगे की सुनवाई होगी।

