हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी- “बर्खास्तगी अवैध तो माना जाएगा कर्मचारी लगातार सेवा में था, 12 हफ्ते में दें पूरा बैक वेज”
Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के सेवा कानूनों और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर एक बेहद नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने सड़क निर्माण विभाग के कर्मचारी अमरेश कुमार झा को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को विभाग की गलत और अवैध कार्रवाई का खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने विभाग के उस मनमाने आदेश को सिरे से रद्द कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी अवधि को ‘नो वर्क, नो पे’ (काम नहीं तो वेतन नहीं) घोषित कर उनके वेतन व अन्य लाभों पर रोक लगा दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद साल 2017 से शुरू हुआ था। सड़क निर्माण विभाग के कर्मचारी अमरेश कुमार झा को 13 नवंबर 2017 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इस एकतरफा कार्रवाई को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
- 2021 में मिली पहली जीत: हाई कोर्ट ने साल 2021 में ही विभाग के बर्खास्तगी आदेश को अवैध पाते हुए रद्द कर दिया था और अमरेश कुमार झा को सेवा में पुनर्बहाली का निर्देश दिया था।
- सुप्रीम कोर्ट तक हारी सरकार: हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार पहले एलपीए (LPA) और बाद में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (SLP) लेकर गई, लेकिन सरकार की अपीलें हर जगह खारिज हो गईं।
- विभाग की नई चाल: कानूनी रूप से पूरी तरह हारने के बाद विभाग ने नवंबर 2023 में अमरेश झा को सेवा में वापस तो ले लिया, लेकिन चालाकी बरतते हुए 13 नवंबर 2017 से 24 नवंबर 2023 तक की लगभग 6 साल की अवधि को ‘नो वर्क, नो पे’ घोषित कर दिया और बैक वेज देने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज किया ‘नो वर्क, नो पे’ का नियम?
न्यायमुर्ति दीपक रोशन की अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए विभाग की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने फैसले का मुख्य आधार इन बिंदुओं को बनाया:
- अवैध आदेश का प्रभाव शून्य: कोर्ट ने कहा कि जब मूल बर्खास्तगी आदेश को ही अदालत द्वारा ‘अवैध’ घोषित कर दिया गया है, तो कानून की नजर में यह माना जाएगा कि कर्मचारी कभी सेवा से बाहर गया ही नहीं था और वह लगातार अपनी ड्यूटी पर था।
- विभाग की गलती, कर्मचारी क्यों भुगते?: कर्मचारी काम पर इसलिए नहीं आ सका क्योंकि विभाग ने उसे अवैध रूप से हटा दिया था। ऐसे में ‘नो वर्क, नो पे’ का सिद्धांत लागू नहीं होता।
- नियोक्ता पर सुबूत का जिम्मा: अदालत ने साफ किया कि यदि नियोक्ता (Employer) यह साबित नहीं कर पाता कि बर्खास्तगी के दौरान कर्मचारी कहीं और लाभकारी रोजगार (Gainful Employment) में था और कमाई कर रहा था, तो उसे पूर्ण बैक वेज और अन्य सभी सेवा लाभ देने ही होंगे।
अदालत का कड़ा निर्देश: 12 सप्ताह में करें पूरा भुगतान
हाई कोर्ट का आदेश: अदालत ने सड़क निर्माण विभाग को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 13 नवंबर 2017 से 24 नवंबर 2023 तक की पूरी अवधि को ‘ऑन ड्यूटी’ (सेवा अवधि) माना जाए। इस अवधि का पूरा बकाया वेतन (Back Wages), सालाना वेतनवृद्धि (Increments) और अन्य सभी अनुषंगिक सेवा लाभों का निर्धारण कर 12 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता अमरेश कुमार झा को भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

