Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी संपत्ति के नीलामी खरीदार को पूर्व उपभोक्ता के बिजली बकाये का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) द्वारा मंगलम इस्पात से पुराने उपभोक्ता के बकाये के रूप में करीब 4.92 करोड़ रुपये तथा बाद में संशोधित टैरिफ के आधार पर 1.34 करोड़ रुपये की मांग को अवैध ठहराते हुए संबंधित मांग पत्रों को रद्द कर दिया। मामला मंगलम इस्पात द्वारा पंजाब नेशनल बैंक की ई-नीलामी में एम/एस श्री हनुमान एलॉयज प्रा. लि. की संपत्ति खरीदने से जुड़ा था। संपत्ति खरीदने के बाद डीवीसी ने नया बिजली कनेक्शन देने से पहले पूर्व मालिक के बकाये का भुगतान करने की शर्त रखी थी। बाद में अदालत के अंतरिम आदेश के तहत कंपनी ने किस्तों में राशि जमा कर बिजली कनेक्शन प्राप्त किया था, जो अंतिम निर्णय के अधीन था।
हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग (बिजली आपूर्ति संहिता) विनियम, 2015 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि यदि नया खरीदार पूर्व उपभोक्ता से किसी प्रकार से जुड़ा नहीं है और संपत्ति वैधानिक प्रक्रिया या नीलामी के माध्यम से प्राप्त की गई है, तो उससे पुराने बकाये की वसूली नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता का पूर्व उपभोक्ता से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने डीवीसी को दोनों मांग पत्र रद्द करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि पूर्व उपभोक्ता के बकाये की वसूली कानून के अनुसार उसी से की जा सकती है, न कि नीलामी खरीदार से। साथ ही अंतरिम आदेश के तहत जमा कराई गई राशि के संबंध में भी याचिकाकर्ता को विधि के अनुसार राहत देने का निर्देश दिया।

