पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त; कोर्ट ने कहा- “कब्जे का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके आरोपी, हिरासत में पूछताछ जरूरी”
Ranchi News: राजधानी रांची में अवैध रूप से कोख की जांच और भ्रूण का लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह के खिलाफ अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। रांची के न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-प्रथम की अदालत ने पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अवैध रूप से भ्रूण का लिंग परीक्षण करने के आरोप में जेल में बंद डॉक्टर सुरंजन कुमार और क्लीनिक की महिला कर्मचारी शीला कुमारी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं (Bail Pleas) सिरे से खारिज कर दी हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ भंडाफोड़?
यह पूरा मामला रातू थाना कांड संख्या से जुड़ा है। समाज को कलंकित करने वाले इस रैकेट का भंडाफोड़ जिला प्रशासन की मुस्तैदी से हुआ था:
- प्रशासन की गुप्त छापेमारी: गत 7 जून 2026 को रांची के उपायुक्त (DC) के गुप्त निर्देश पर पंडरा स्थित एक क्लीनिक में औचक छापेमारी की गई थी।
- बिना रजिस्ट्रेशन की मशीन बरामद: इस छापेमारी के दौरान क्लीनिक से एक पोर्टेबल (आसानी से ले जाई जा सकने वाली) अल्ट्रासाउंड मशीन बरामद की गई, जिसका कोई वैध पंजीकरण (Registration) नहीं था।
- मोटी रकम की वसूली: आरोपियों पर आरोप है कि वे पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के नियमों की धज्जियां उड़ाकर इस अवैध मशीन के जरिए गर्भवती महिलाओं के भ्रूण का लिंग परीक्षण करते थे और इसके एवज में उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
इस छापेमारी के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था और आरोपी 8 जून 2026 से लगातार न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल में बंद हैं।
कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत? न्यायधीश की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आरोपियों की तरफ से राहत की गुहार लगाई गई, लेकिन अदालत ने केस डायरी और पुलिस के साक्ष्यों को देखने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश का मुख्य आधार इन बिंदुओं को बनाया:
- आरोपों का समर्थन: केस डायरी में दर्ज गवाहों के बयान और प्राथमिक साक्ष्य (Prima Facie Evidence) सीधे तौर पर डॉक्टर और क्लीनिक कर्मी के खिलाफ लगे संगीन आरोपों का समर्थन करते हैं।
- स्पष्टीकरण का अभाव: आरोपियों के पास से जो बिना पंजीकरण की पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मिली है, वह उसके कब्जे (Possession) को लेकर अदालत के समक्ष कोई भी वैध या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके।
- जांच पर पड़ेगा असर: अदालत ने माना कि यह मामला सामाजिक ताने-बाने और कानून से जुड़ा एक बेहद गंभीर अपराध है। चूंकि मामले की जांच (Investigation) अभी शुरुआती और महत्वपूर्ण दौर में है, इसलिए इस रैकेट की पूरी कड़ियों को जोड़ने के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने दोनों ही आरोपियों को जेल में ही रखने का फैसला सुनाया।

