पिता की मौत के मामले में न्यायिक दंडाधिकारी ने लिया संज्ञान, 2 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
Ranchi News: स्थित मेदांता अस्पताल और उसके दो डॉक्टरों—डॉ. नीरज प्रसाद एवं डॉ. तेजवीर सिंह—की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (JMFC-IX) मयांक मलियाज की अदालत ने इलाज में घोर लापरवाही (Medical Negligence) के कारण सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी (पूर्व आईजी) एवं राष्ट्रपति पदक से सम्मानित स्व. मदन मोहन ओझा की हुई मौत के मामले में सुनवाई करते हुए अस्पताल प्रबंधन और दोनों डॉक्टरों के खिलाफ समन (Summon) जारी किया है। इलाज में देरी और सीजीएचएस कार्ड से उपेक्षा का आरोप शिकायतकर्ता निशांत शेखर (मृतक के पुत्र) द्वारा दायर शिकायत वाद (Compliant Case No. 19042/2025) के अनुसार, 2 अप्रैल 2025 को उनके पिता पूर्व आईपीएस मदन मोहन ओझा को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत पर मेदांता अस्पताल, रांची लाया गया था। आरोप है कि मरीज के पास केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) का कार्ड होने के कारण अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों ने उनके इलाज में उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया और उन्हें साढ़े चार घंटे से अधिक समय तक बिना उचित इलाज के ओपीडी/इमरजेंसी में रोके रखा। गंभीर स्थिति के बावजूद मरीज को तत्काल आईसीयू (ICU) में भर्ती नहीं किया गया और कार्डियोलॉजिस्ट की जगह अन्य विभागों में रेफर कर कीमती समय गंवाया गया। अंततः शाम करीब 5 बजे दूसरे हृदयघात (Heart Attack) के कारण पूर्व आईपीएस अधिकारी की मृत्यु हो गई।
अदालत का रुख और आदेश प्रस्तावित अभियुक्तों (अस्पताल व डॉक्टरों) की ओर से कानूनी व प्रक्रियात्मक तर्कों के आधार पर केस खारिज करने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने शिकायतकर्ता के शपथ बयान (S/A), गवाहों (मृतक की पत्नी अनीता ओझा व केयरटेकर) के बयानों और रिकॉर्ड पर मौजूद ईसीजी (ECG) रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) व 61 के तहत मामला बनता है। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए अभियुक्तों को अदालत में प्रस्तुत होने के लिए समन जारी करने का आदेश दिया।

