Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट (HC News) एडवोकेट्स एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय के कामकाज के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपमानजनक, भ्रामक और अवमाननापूर्ण टिप्पणियों पर कड़ा संज्ञान लिया है।
एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन आधारहीन पोस्टों की कड़े शब्दों में निंदा की है। एसोसिएशन का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही ये पोस्ट किसी भी प्रकार के प्रामाणिक तथ्य या साक्ष्य पर आधारित नहीं हैं।
इनका मकसद जनता की नजर में न्यायिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाना और न्याय व्यवस्था में लोगों के भरोसे को कमजोर करना है। समिति ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत उच्च न्यायालय एक ‘कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड’ है, और इसकी गरिमा व अधिकार क्षेत्र की रक्षा करना अनिवार्य है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की निष्पक्ष व तर्कसंगत आलोचना का स्वागत है, लेकिन तथ्यों से परे झूठे और दुर्भावनापूर्ण आरोप आलोचना नहीं, बल्कि अदालत को बदनाम करने और न्यायिक कार्यों में बाधा डालने का सुनियोजित प्रयास हैं।
कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
बार एसोसिएशन ने कहा कि वे न्याय प्रणाली का अभिन्न हिस्सा हैं और अदालत पर हो रहे ऐसे हमलों पर मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। समिति ने निम्नलिखित कदम उठाने की बात कही है:
1- संबंधित लोगों से इन आपत्तिजनक पोस्टों को तुरंत हटाने और ऐसे कृत्यों से बाज आने को कहा गया है।
2- आम जनता और मीडिया से अपील की गई है कि वे ऐसी अपुष्ट और भ्रामक सामग्री को साझा या प्रचारित न करें।
3- एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि इस मामले को माननीय न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा और न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) तथा अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
4- सक्षम प्राधिकारियों से इन पोस्टों के मूल स्रोत की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
एसोसिएशन के महासचिव नवीन कुमार की ओर से जारी इस विज्ञप्ति में झारखंड हाईकोर्ट और न्यायपालिका की स्वतंत्रता, सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता जताई गई है।

