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HC News: जेल जैसे संवेदनशील संस्थान में आउटसोर्स से नियुक्ति मनमाना, HC ने सरकार का आदेश किया निरस्त, कहा- सभी को करें नियमित

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By Devesh Ananad On 24 Sep, 2026
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Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य की जेलों में स्वीकृत स्थायी पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मियों से काम लेने के राज्य सरकार के फैसले को रद कर किया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट कहा कि जेल जैसे संवेदनशील संस्थानों में स्वीकृत पदों को आउटसोर्स एजेंसी के हवाले कर कर्मियों से काम लेना मनमाना और असंवैधानिक है।

अदालत ने 23 नवंबर 2021 को जारी सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत दैनिक वेतनभोगी और अन्य कर्मियों को आउटसोर्सिंग व्यवस्था के अधीन करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने सरकार को 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत संबंधित कर्मियों की सेवा नियमित करने की प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।

नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक इन कर्मियों को 23 नवंबर 2021 से पहले जिस वेतन या मजदूरी का भुगतान किया जा रहा था, उसी के अनुसार भुगतान जारी रखने का आदेश दिया गया है।

19 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कड़ा आदेश

हाईकोर्ट ने लक्ष्मीकांत गुइन समेत 19 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं में रांची, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, रामगढ़ और बोकारो की जेलों में लंबे समय से दैनिक वेतनभोगी और अन्य पदों पर काम कर रहे कर्मी शामिल हैं।

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कोर्ट ने पाया कि ये कर्मी वर्षों से स्वीकृत पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा व्यवस्था को बदलकर उन्हें आउटसोर्सिंग के अधीन करने का फैसला लिया गया। अदालत ने इस कार्रवाई को उचित नहीं माना।

बिना नीति के आउटसोर्सिंग का फैसला

अदालत ने सरकार के फैसले की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने पाया कि आउटसोर्सिंग का निर्णय लिए जाने के समय राज्य सरकार के पास आउटसोर्सिंग को लेकर कोई स्पष्ट नीतिगत निर्णय नहीं था। इसके बावजूद स्वीकृत पदों पर काम कर रहे कर्मियों को आउटसोर्सिंग व्यवस्था में डाल दिया गया।

कोर्ट ने यह भी गौर किया कि इसी तरह के 183 कर्मियों को 3 मार्च 2021 के सरकारी प्रस्ताव के तहत नियमित किया जा चुका है। ऐसे में समान परिस्थितियों में लंबे समय से काम कर रहे याचिकाकर्ताओं के साथ अलग व्यवहार किए जाने का कोई ठोस आधार नहीं दिखा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाईकोर्ट ने नरेंद्र कुमार तिवारी बनाम झारखंड सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत पदों पर नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को निर्धारित नियमित नियुक्ति प्रक्रिया का पालन करना होगा। आउटसोर्सिंग को नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।

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भविष्य के लिए सरकार को स्पष्ट चेतावनी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सरकार के लिए भविष्य की व्यवस्था भी स्पष्ट कर दी। अदालत ने कहा कि आगे किसी भी स्वीकृत पद पर आउटसोर्सिंग के माध्यम से व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की जाएगी। यानी जिन पदों को सरकार ने स्थायी रूप से स्वीकृत किया है, उन्हें आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए भरकर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया से बचने की अनुमति नहीं होगी।

आठ सप्ताह में नियमितीकरण, तब तक पुराना भुगतान

अदालत ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत संबंधित कर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। तब तक उनके वेतन-मजदूरी में कटौती नहीं की जाएगी और 23 नवंबर 2021 से पहले जिस दर से भुगतान मिल रहा था, उसी के अनुसार भुगतान जारी रहेगा।

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देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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