– 2013 में कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर हमला कर सीनियर नेताओं और पुलिसकर्मियों समेत 27 लोगों की कर दी गई थी हत्या – जगदलपुर स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट ने यूएपीए, आईपीसी और एक्सप्लोसिव एक्ट के तहत सुनाया फैसला
Jagdalpur/Raipur/Ranchi: छत्तीसगढ़ के चर्चित और बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर स्थित एनआईए (NIA) की विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन सीपीआई (माओवादी) के 10 दोषी कैडरों को मृत्युदंड (फांसी की सजा) की सजा सुनाई है।
एनआईए की विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा की बिंदु पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर 16 सितंबर को अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया।
क्या था झीरम घाटी हमला?
यह मामला 25 मई 2013 का है, जब बस्तर जिले के दरभा क्षेत्र स्थित झीरम घाटी (एनएच-221) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला गुजर रहा था। घात लगाकर बैठे सीपीआई (माओवादी) के सशस्त्र कैडरों ने आईईडी (IED) ब्लास्ट, अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला कर दिया था। इस नृशंस हमले में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और पुलिसकर्मियों समेत 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 35 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इलाज के दौरान 3 और घायलों ने दम तोड़ दिया था, जिससे मृतकों की कुल संख्या 27 हो गई थी। हमले के बाद माओवादी मृतकों व पीड़ितों के हथियार, वॉकी-टॉकी, मोबाइल और अन्य सामान लूटकर ले गए थे।
एनआईए की जांच और आरोप पत्र
मामले की जांच एनआईए (कांड संख्या RC-06/2013/NIA/DLI) द्वारा की गई। जांच में यह बात सामने आई कि माओवादियों के टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (TCOC) के तहत वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की एक बड़ी आपराधिक साजिश रची गई थी।
चार्जशीट: एनआईए ने 25 सितंबर 2014 को 9 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट और 28 सितंबर 2015 को 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की थी (कुल 39 आरोपी)।
गवाही: शुरुआती मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी।
किन धाराओं के तहत हुई सजा?
एनआईए कोर्ट ने सभी 10 नक्सलियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 103, 121, 121(A), 122, 302, 307, 396, 397 व 120(B); गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 16, 18, 20, 38, 39 व 40; आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई।

