नगड़ी की 2.98 एकड़ जमीन पर मूल रैयतों का दावा खारिज, मुआवजा भुगतान के बाद सरकार का अधिकार कायम
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के कांके अंचल स्थित नगड़ी गांव की 2.98 एकड़ जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कर मूल रैयतों को लौटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने दो सितंबर को पारित आदेश में कहा कि जमीन का वर्ष 1957-58 में विधि सम्मत तरीके से अधिग्रहण किया गया था। अवॉर्ड पारित होने के साथ मुआवजे का भुगतान भी किया जा चुका है। ऐसे में बाद में जमीन का उपयोग किसी दूसरे सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने के आधार पर उसे मूल रैयतों को वापस नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं ने प्लॉट संख्या 2055, 2124, 2068, 2281 और 2882 की 2.98 एकड़ जमीन वापस करने की मांग की थी। उनका दावा था कि जमीन उनके पूर्वजों के नाम दर्ज थी और वे लगातार कब्जे में हैं। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता खुद को मूल अवार्डियों का कानूनी उत्तराधिकारी साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज या वंशावली भी पेश नहीं कर सके।
रिंग रोड और एनयूएसआरएल के लिए इस्तेमाल हुई जमीन
अदालत को बताया गया कि जमीन का अधिग्रहण बिरसा कृषि कॉलेज के लिए किया गया था। बाद में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने दूसरे सार्वजनिक उपयोग के लिए एनओसी दी। इसके बाद जमीन का कुछ हिस्सा नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (एनयूएसआरएल) को दिया गया, जबकि कुछ हिस्से का इस्तेमाल रांची रिंग रोड के निर्माण में हुआ।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि विधि सम्मत अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान के बाद जमीन राज्य में निहित हो जाती है। केवल इस आधार पर कि मूल उद्देश्य के लिए पूरी जमीन का इस्तेमाल नहीं हुआ, उसे पूर्व रैयतों को वापस नहीं किया जा सकता। करीब 66 वर्ष बाद दाखिल याचिका में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं मिलने पर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

