Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने चौथे चरण में अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित और समाहित कर्मचारियों को 5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोग का लाभ देने से राज्य सरकार इनकार नहीं कर सकती। अदालत ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द करते हुए संबंधित कर्मचारी को सभी वेतन पुनरीक्षण लाभ और बकाया राशि देने का निर्देश दिया है। मामला करमचंद भगत कॉलेज, बड़ो के शिक्षकेत्तर कर्मचारी Jagdish Oraon की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। अदालत ने कहा कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठाना न केवल अनुचित है बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन भी है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि इसी कॉलेज के अन्य कर्मचारियों को पूर्व में वेतन पुनरीक्षण का लाभ मिल चुका है, जबकि समान परिस्थिति होने के बावजूद याचिकाकर्ता को वंचित रखा गया। दूसरी ओर राज्य सरकार ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का नाम न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा आयोग की रिपोर्ट में नहीं था, इसलिए वे लाभ के पात्र नहीं हैं। अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही विश्वविद्यालयों को नियमितीकरण का अधिकार दे चुका है और उसके बाद राज्य सरकार दोबारा उस पर सवाल नहीं उठा सकती। फैसले के बाद राज्य के कई शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

