Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट ने अदालती आदेशों के अनुपालन में राज्य सरकार की ओर से की जा रही देरी और अधिकारियों के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े अवमानना मामलों की सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि डिजिटल युग में मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को कामकाज ठप होने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
यह मामला हिंडाल्को इंडस्ट्रीज समेत अन्य कंपनियों को बकाया राशि के भुगतान से संबंधित है। हाई कोर्ट ने 4 मार्च 2025 को भुगतान का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखते हुए अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय दिया था। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दो अंतरिम आवेदन दाखिल किए गए—पहला कैबिनेट की मंजूरी के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया और दूसरा खान एवं भूविज्ञान विभाग के सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए। सरकार ने दलील दी कि फाइल तैयार है, लेकिन मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के कारण कैबिनेट बैठक नहीं हो सकी।
इस पर हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सरकार आदेश के अनुपालन को लेकर गंभीर होती, तो वर्चुअल माध्यम से भी कैबिनेट की मंजूरी ली जा सकती थी। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब 17 दिसंबर 2025 को सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, तो बिना अनुमति वे 17 जनवरी 2026 को विदेश दौरे पर कैसे चले गए।
अदालत ने यह भी पूछा कि सचिव की अनुपस्थिति में डिप्टी सचिव ने किस अधिकार से हलफनामा दायर किया और क्या इसके लिए विधिवत अनुमति ली गई थी। कोर्ट ने सरकार के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त मानते हुए कई बिंदुओं पर विस्तृत जवाब तलब किया है।
मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी।

