Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट से राज्य के पुलिसकर्मियों (कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों और हवलदारों) को एक बड़ी राहत मिली है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों व हवलदारों को एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) का लाभ देने के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर अपील याचिका को मंगलवार को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद अब कार्यरत और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को उनकी देय तिथि से बिना किसी शर्त के एसीपी का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
एकल पीठ के फैसले को खंडपीठ ने रखा बरकरार
मामले में प्रतिवादियों (पुलिसकर्मियों) की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने अदालत में पक्ष रखा। दरअसल, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की एकल पीठ (सिंगल बेंच) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें डीजीपी द्वारा लगाई गई शर्तों को रद्द कर दिया गया था। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एकल पीठ के आदेश को सही ठहराया और सरकार की अपील को निरस्त कर दिया।
क्या था पूरा मामला और डीजीपी की तीन शर्तें?
एकल पीठ में सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि विभाग ने कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों व हवलदारों को एसीपी का लाभ देने के लिए ट्रेनिंग पास करने की अनिवार्यता जोड़ दी थी। तत्कालीन डीजीपी द्वारा इसके लिए तीन कड़े नियम व शर्तें तय की गई थीं, जिन्हें पुलिसकर्मियों ने सेवा नियमों के खिलाफ बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
डीजीपी द्वारा लगाई गई मुख्य शर्तें:
- यदि कोई सिपाही स्वेच्छा (अपनी मर्जी) से ट्रेनिंग में नहीं जाता है, तो उसे एसीपी का लाभ नहीं दिया जाएगा।
- यदि कोई सिपाही पहली बार में ट्रेनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो भी वह इस लाभ से वंचित रहेगा।
कोर्ट का सख्त रुख: देय तिथि से मिले पूरा लाभ
इससे पूर्व, हाईकोर्ट की एकल पीठ के तत्कालीन जस्टिस अंबुज नाथ की अदालत ने 16 अगस्त 2024 को इस मामले पर सुनवाई करते हुए डीजीपी द्वारा लगाई गई तीनों शर्तों को पूरी तरह निरस्त (खारिज) कर दिया था। एकल पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया था कि कांस्टेबल कैडर के सिपाहियों को बिना किसी शर्त के उनके तय समय से एसीपी का लाभ दिया जाए। अब खंडपीठ द्वारा सरकार की अपील खारिज किए जाने के बाद, सालों से इस लाभ का इंतजार कर रहे वर्तमान और रिटायर्ड पुलिसकर्मियों को वित्तीय अपग्रेडेशन का पूरा फायदा मिल सकेगा।

