Ranchi News:महिलाओं के लिए शत-प्रतिशत सीटें आरक्षित किए जाने के अहम मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।
क्या है मामला
मामला झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा बाल कल्याण विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों पर नियुक्ति से जुड़ा है। आयोग ने इन पदों के लिए केवल महिला अभ्यर्थियों से आवेदन मांगा था, जिसे चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि किसी भी पद पर शत-प्रतिशत आरक्षण देना संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
राज्य सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि महिला सुपरवाइजर का पद विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े कार्यों के लिए बनाया गया है। इसमें गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और माताओं से संबंधित जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए यह पद केवल महिला कैडर के लिए ही उपयुक्त है। उन्होंने यह भी दलील दी कि देश के कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू है।
पहले क्या कहा था कोर्ट
इससे पहले एकल पीठ ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए इसे खंडपीठ के समक्ष भेज दिया था। एकल पीठ ने यह सवाल उठाया था कि क्या किसी पद पर 100% आरक्षण देना संवैधानिक रूप से वैध है या नहीं।
अन्य विवाद भी जुड़े
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर बाहर कर दिया गया था। उनका कहना था कि उनके पास सहायक विषयों की डिग्री है, जिसे आयोग ने मान्य नहीं माना, जबकि नियमावली में ऐसा स्पष्ट नहीं है। अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिस पर अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

