Ranchi/Dumka: झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका जिले के सरायहाट थाना क्षेत्र से जुड़े एक आपराधिक मामले में याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर कि एक पक्ष ने काउंटर केस (प्रति-दावा केस) दर्ज कराया है, दूसरे पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मुकदमे को रद्द नहीं किया जा सकता। Justice अनिल कुमार चौधरी की पीठ ने सुनवाई करते हुए दुमका के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में लंबित P.C.R. Case No. 83 of 2021 की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया।
📌 मामला क्या है?
- याचिकाकर्ता: राजेश रंजन उर्फ राजेश झा (42 वर्ष) और राजीव कुमार झा (45 वर्ष) — दोनों निवासी ग्राम खोजवा, थाना सरायहाट, जिला दुमका।
- शिकायतकर्ता: सुशील कुमार झा (51 वर्ष, निवासी ग्राम खोजवा, दुमका)।
- घटना व आरोप: 23 जनवरी 2021 की दोपहर 3:15 बजे याचिकाकर्ताओं पर शिकायतकर्ता के घर में अवैध रूप से घुसने (House Trespass), उनकी शिक्षिका पत्नी के बैग से ₹2,000 चोरी करने, सरकारी नौकरी से निलंबित कराने और पति को जान से मारने की धमकी देकर रंगदारी (Extortion) मांगने का आरोप है।
- निचली अदालत की स्थिति: दुमका के न्यायिक दंडाधिकारी (1st Class) ने 13 मई 2022 को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 380 (चोरी), 385 (रंगदारी के लिए भय दिखाना), 448 (गृह-अतिचार) और 504 (अपमान) के तहत संज्ञान लिया था। मामले में आरोप (Charge) भी तय हो चुके हैं और गवाही प्रक्रिया जारी है।
⚖️ हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां एवं कानूनी निष्कर्ष
न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं की अर्जी को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया:
- 1. काउंटर केस के आधार पर रद्द नहीं हो सकती कार्रवाई:याचिकाकर्ता संख्या 1 का मुख्य तर्क था कि उन्होंने भी विपरीत पक्ष के खिलाफ सरायहाट थाने में केस (Saraiyahat P.S. Case No. 28/2021) दर्ज कराया है। इस पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के लैंडमार्क फैसले टी.टी. एंटनी बनाम केरल राज्य [(2001) 6 SCC 181] का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य केस और काउंटर केस दोनों एक साथ चल सकते हैं। केवल काउंटर केस का होना दूसरे मामले को रद्द करने का आधार नहीं हो सकता।
- 2. प्रथम दृष्टया (Prima Facie) अपराध सिद्ध होना:कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता और जांच गवाहों के बयानों के आधार पर याचिकाकर्ताओं के खिलाफ घर में घुसकर चोरी करने और रंगदारी मांगने के प्रत्यक्ष और गंभीर आरोप हैं। यदि आरोपों को सही माना जाए तो सभी संबंधित धाराएं पूरी तरह लागू होती हैं।
- 3. साफ नीयत (Clean Hands) से कोर्ट न आना:अदालत ने यह भी नोट किया कि निचली अदालत में पहले ही आरोप (Charges) गठित किए जा चुके हैं, फिर भी याचिकाकर्ताओं ने आरोप गठन के आदेश को चुनौती नहीं दी, बल्कि केवल शुरुआती समनिंग प्रक्रिया और पूरी कार्यवाही को निरस्त कराने की मांग की।
📝 कोर्ट का अंतिम आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियों और साक्ष्यों को देखते हुए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत प्रदत्त असाधारण शक्तियों का उपयोग कर इस मुकदमे को रद्द करना उचित नहीं है। अदालत ने याचिका को बिना किसी मेरिट (Without Merit) का पाते हुए पूरी तरह से खारिज (Dismissed) कर दिया, जिससे निचली अदालत में चल रहा आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा।

