शरत कुमार व अन्य की याचिका पर सुनवाई, 3 सप्ताह में प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने पथ निर्माण विभाग (Road Construction Department) में वर्षों से दैनिक वेतनभोगी (Daily Wager) के रूप में कार्यरत कर्मियों की सेवा नियमितीकरण (Regularization) की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने पथ निर्माण विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले अभ्यावेदन (Representation) पर विचार करते हुए तीन माह के भीतर एक तर्कसंगत और नियमानुकूल आदेश (Reasoned Order) पारित करें। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश शंकर की एकल पीठ ने शरत कुमार एवं 13 अन्य द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
क्या था मामला?
हजारीबाग, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा आदि जिलों के रहने वाले शरत कुमार, विनोद कुमार दास, शर्मीला कुमारी सहित 14 दैनिक वेतनभोगियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने बिहार सरकार के तत्कालीन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के परिपत्र संख्या 16441 (दिनांक 03.12.1980) और परिपत्र संख्या 3577 (दिनांक 25.04.1997) का हवाला देते हुए अपनी शुरुआती नियुक्ति की तिथि से ही नियमित सेवा में समायोजित/नियुक्त करने की मांग की थी।
पूर्व के फैसलों के आलोक में निष्पादन
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अनुराग कुमार और राज्य सरकार के अधिवक्ता मुन्ना लाल यादव ने संयुक्त रूप से पीठ को बताया कि यह मामला हाईकोर्ट द्वारा W.P.(S) No. 3732/2022 में पारित पूर्व के आदेश (दिनांक 07.02.2024) से पूरी तरह आच्छादित (Covered) है। इसलिए इस याचिका को भी उसी तर्ज पर निष्पादित कर दिया जाए।
अदालत का निर्देश:
- 3 सप्ताह का समय: हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट दी है कि वे इस आदेश के तीन सप्ताह के भीतर पथ निर्माण विभाग के सचिव (प्रतिवादी संख्या 2) के समक्ष अपनी मांगों के संबंध में नया अभ्यावेदन सौंपें।
- व्यक्तिगत सुनवाई और 3 माह में निर्णय: सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे याचिकाकर्ताओं या उनके अधिकृत प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर प्रदान करें। इसके बाद प्रासंगिक नीतियों, नियमों और परिपत्रों के आलोक में तीन महीने के अंदर अंतिम निर्णय लेते हुए आदेश जारी करें।
- स्पीड पोस्ट से मिलेगी जानकारी: अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पारित आदेश की प्रति याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए पते पर स्पीड पोस्ट के माध्यम से अनिवार्य रूप से भेजी जाए।

