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HC News: टेंडर में तारीख की गलती बताकर राहत मांगना पड़ा महंगा, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

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By CourtNews Desk On 14 Aug, 2026
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लातेहार डिग्री कॉलेज निर्माण का ठेका पाने के लिए राज कंस्ट्रक्शन ने दी थी 1 जनवरी 2025 की उपकरण संबंधी जानकारी, निविदा शर्त में 1 जनवरी 2026 की थी अनिवार्यता; हाईकोर्ट ने कहा- टंकण त्रुटि की दलील बाद में गढ़ी गई

Ranchi News: लातेहार में डिग्री कॉलेज निर्माण के लिए जारी निविदा में तकनीकी बोली खारिज होने के बाद राहत मांगने वाली राज कंस्ट्रक्शन की याचिका झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि निविदा की अनिवार्य शर्त का पालन नहीं करने पर कंपनी की तकनीकी बोली खारिज करना पूरी तरह उचित था। कंपनी द्वारा दस्तावेज में हुई गलती को महज टंकण त्रुटि बताने की दलील को अदालत ने बाद में तैयार किया गया बचाव माना। राज कंस्ट्रक्शन ने झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड की निविदा समिति के 27 जुलाई 2026 के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी तकनीकी बोली को निविदा दस्तावेज की शर्त संख्या 4.5 (बी) (ए) का पालन नहीं करने के कारण अस्वीकार कर दिया गया था। खंडपीठ ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद कहा कि याचिकाकर्ता की बोली सही तरीके से खारिज की गई थी। अदालत को निर्णय में किसी प्रकार की मनमानी या अनुचितता नहीं मिली। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज कंस्ट्रक्शन की याचिका खारिज कर दी और लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया।

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उपकरणों की उम्र बताने में एक साल का अंतर

निविदा की शर्त के अनुसार बोली लगाने वाले ठेकेदार को निर्माण कार्य के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता साबित करनी थी। इसके लिए कंपनी ने एक नोटरीकृत शपथपत्र भी दाखिल किया। लेकिन शपथपत्र में उपकरणों की अधिकतम उम्र 1 जनवरी 2025 के आधार पर बताई गई, जबकि निविदा के निर्धारित प्रपत्र में उपकरणों की अधिकतम उम्र 1 जनवरी 2026 के आधार पर बताना अनिवार्य था। कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि 2025 की तारीख लिखना महज टंकण संबंधी गलती थी। कंपनी का दावा था कि बोली जमा करने की अंतिम तारीख तक उसके पास निविदा में निर्धारित सभी महत्वपूर्ण उपकरण मौजूद थे। तकनीकी बोली खारिज होने के दो दिन बाद 29 जुलाई को कंपनी ने विभाग के समक्ष अभ्यावेदन भी दिया था।

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विभाग ने कहा- बाद में बनाई गई कहानी

विभाग की ओर से इस दलील का विरोध किया गया। बताया गया कि 29 जुलाई के अभ्यावेदन में कंपनी ने कहीं भी यह नहीं कहा था कि शपथपत्र में तारीख गलती से 2025 लिखी गई है। इसके बजाय कंपनी ने यह कहते हुए आश्वासन दिया था कि निविदा के तहत जिस उपकरण की जरूरत होगी, उसे जरूरत पड़ने पर खरीदा जाएगा। हाईकोर्ट ने इसी अभ्यावेदन को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि यह अभ्यावेदन टंकण त्रुटि की दलील के विपरीत है और इससे यह संकेत मिलता है कि बोली जमा करने की अंतिम तारीख तक कंपनी के पास आवश्यक महत्वपूर्ण उपकरण उपलब्ध नहीं थे।

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‘टंकण त्रुटि’ की दलील बाद में गढ़ी गई

खंडपीठ ने कहा कि 27 जुलाई को तकनीकी बोली खारिज होने के बाद 29 जुलाई को दिए गए अभ्यावेदन में किसी भी तरह की टंकण त्रुटि का उल्लेख नहीं किया गया था। साथ ही, रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज भी नहीं था, जिससे पता चले कि नोटरीकृत शपथपत्र को बाद में ठीक किया गया था। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की गंभीर कमी को महज टंकण त्रुटि बताकर दूर नहीं किया जा सकता। निविदा की अनिवार्य शर्त का पालन नहीं किया गया था। इसलिए निविदा समिति द्वारा तकनीकी बोली खारिज करने के फैसले में न तो मनमानी थी और न ही वह अनुचित था।

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