Ranchi News: अदालत की टिप्पणी— ‘एसओपी बनाने में पहले ही लग चुका है काफी समय’, न्याय मित्र को 10 दिनों में सुझाव देने की छूट, अगली सुनवाई 30 जुलाई को
राँची: झारखंड में भू-माफियाओं द्वारा जमीन कब्जा करने की बढ़ती घटनाओं पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य में जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और कब्जे से संबंधित स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जमीन कब्जा मामलों से निपटने के लिए तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के ड्राफ्ट पर हर हाल में छह सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय (स्वीकृत या अस्वीकृत) ले।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जमीन कब्जा का मुद्दा राज्य के लिए बहुत संवेदनशील है और इससे निपटने के लिए प्रभावी एसओपी बनाने में पहले ही काफी वक्त जाया हो चुका है। अब इसमें और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य सचिव ने दाखिल किया शपथपत्र, ड्राफ्ट तैयार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि झारखंड में भूमि कब्जा के मामलों पर लगाम लगाने के लिए एक ‘ड्राफ्ट एसओपी’ तैयार कर ली गई है। सरकार ने बताया कि सूबे के मुख्य सचिव ने 9 जून को अदालत में एक शपथपत्र (Affidavit) दाखिल किया है, जिसके साथ इस ड्राफ्ट एसओपी को भी संलग्न किया गया है। वर्तमान में इस ड्राफ्ट को अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति के लिए राज्य सरकार के समक्ष भेज दिया गया है।
न्याय मित्र (Amicus Curiae) देंगे सुझाव
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार के शपथपत्र और ड्राफ्ट एसओपी की प्रति मामले में नियुक्त न्याय मित्र को सौंप दी गई है। अदालत ने न्याय मित्र को छूट दी है कि यदि वे इस ड्राफ्ट में कोई जरूरी सुधार या बदलाव चाहते हैं, तो 10 दिनों के भीतर अपने सुझाव राज्य सरकार को सौंप दें। खंडपीठ ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि एसओपी को अंतिम रूप देते समय न्याय मित्र द्वारा दिए गए सुझावों पर अनिवार्य रूप से विचार किया जाए।
क्यों शुरू हुई यह अदालती कवायद?
गौरतलब है कि झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में भू-माफियाओं का जाल तेजी से फैला है, जिससे आम जनता और जमीन मालिकों को भारी प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। जमीन कब्जे की लगातार बढ़ती वारदातों और इसके कारण कानून-व्यवस्था पर उठते सवालों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार को एक ऐसी फुलप्रूफ और सख्त एसओपी बनाने के लिए बाध्य करना है, जिससे भू-माफियाओं पर तुरंत कानूनी शिकंजा कसा जा सके। खंडपीठ ने सरकार को कड़े नीतिगत फैसले लेने का निर्देश देते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 तय की है।

