अदालती सवाल: कोर्ट ने पूछा- मामले में कोई पीड़ित पक्ष है या नहीं, यदि है तो उन्हें प्रतिवादी क्यों नहीं बनाया गया?
अहम मोड़: जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में सभी आरोपियों की अलग-अलग याचिकाओं को टैग कर एक साथ हो रही है सुनवाई
- एसीबी की बड़ी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इसी साल 9 जनवरी को 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा था जेल।
- सरकारी धन का गबन: रिंग रोड के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में करोड़ों रुपये के गलत मुआवजे के वितरण का है आरोप।
Ranchi News: धनबाद रिंग रोड भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में जेल में बंद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार सहित 17 आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को झारखंड हाई कोर्ट में आंशिक सुनवाई हुई। जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सभी आरोपियों द्वारा दाखिल अलग-अलग जमानत याचिकाओं को एक साथ टैग करते हुए सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तकनीकी पहलू पर ध्यान केंद्रित किया कि इस पूरे घोटाले में कोई मूल पीड़ित पक्ष (जमीन का वास्तविक मालिक या रैयत) है या नहीं? अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पीड़ित पक्ष है और उसे इस याचिका में प्रतिवादी (Respondent) नहीं बनाया गया है, तो उसे तुरंत प्रतिवादी बनाया जाए। कोर्ट इस मामले में बुधवार को भी सुनवाई जारी रखेगा।
क्या था घोटाला?
धनबाद में रिंग रोड निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि का अधिग्रहण किया गया था। आरोप है कि भू-माफिया, तत्कालीन अंचल अधिकारियों और सरकारी बाबुओं की मिलीभगत से असली रैयतों को दरकिनार कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर करोड़ों रुपये के मुआवजे का गलत भुगतान कर दिया गया।
9 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारियां: इस बहुचर्चित घोटाले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस साल 9 जनवरी को एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए जेपीएससी के परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार (जो उस समय संबंधित क्षेत्र में तैनात थे) समेत 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तब से ये सभी आरोपी जेल में हैं।

