चार सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिकाओं को संशोधित वेतनमान का लाभ, हाईकोर्ट ने कहा- आदेश का वास्तविक लाभ भी मिले
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने चार सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिकाओं को लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी आर्थिक लाभ देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं के दावे को कागज पर स्वीकार कर लिया है, लेकिन संशोधित वेतनमान का वास्तविक आर्थिक लाभ अभी उनके खातों में नहीं पहुंचा है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को छह सप्ताह के भीतर राशि उनके बैंक खातों में जमा कराने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने शांति कुमारी समेत चार याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं में शांति कुमारी, प्रभावती मिश्रा, छाया गुहा ठाकुरता और बासो मुंडा शामिल है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से 1989 से 2003 की अवधि के वेतन अंतर की बकाया राशि देने की मांग की थी। उन्होंने समान स्थिति वाले सहायक शिक्षकों से संबंधित पूर्व के न्यायिक आदेशों का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक मामला ले जाने के बाद हार होने पर समान रूप से स्थित कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का लाभ देने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने 1 अप्रैल 1989 से चौथे वेतन पुनरीक्षण के तहत 1400-2600 रुपये के वेतनमान का लाभ देने की मांग की थी। इसके बाद पांचवें और छठे वेतन पुनरीक्षण के अनुरूप वेतन निर्धारण और बकाया अंतर राशि के भुगतान का भी आग्रह किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दायर जवाबी हलफनामे में कहा गया कि याचिकाकर्ताओं की शिकायत का समाधान कर दिया गया है। इस पर याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने बताया कि सरकार ने कागज पर संशोधित वेतन निर्धारण कर दिया है। 18 दिसंबर 1989 के संकल्प के अनुसार 12 वर्ष की सेवा पूरी होने पर 1900 रुपये मासिक मूल वेतन निर्धारित किया गया। वहीं पांचवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार 1 जनवरी 1996 से मूल वेतन 6950 रुपये प्रतिमाह तय किया गया है। हालांकि अधिवक्ता ने बताया कि निर्धारित आर्थिक लाभ और बकाया राशि अभी तक याचिकाकर्ताओं के बैंक खातों में जमा नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने माना कि सरकार ने कागज पर शिकायत का समाधान कर दिया है, लेकिन वास्तविक भुगतान होना बाकी है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति मिलने की तारीख से अधिकतम छह सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के खातों में मौद्रिक लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही याचिका का निपटारा कर दिया गया।

