पिता के बीमा भुगतान को लेकर था विवाद, कोर्ट ने कहा- अधिकारी के खिलाफ धारा 323 और 448 के आरोप के पर्याप्त आधार नहीं
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने एलआईसी के तत्कालीन शाखा प्रबंधक बैजनाथ राय उर्फ बैद्यनाथ राय के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने सुनवाई करते हुए धनबाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी के 30 मई 2019 के संज्ञान एवं समन आदेश तथा धनबाद सत्र न्यायालय के 22 नवंबर 2019 के आदेश को भी रद्द कर दिया।
मामला धनबाद के सीपी केस संख्या 2243/2015 से जुड़ा था। शिकायतकर्ता विजय कुमार साव का आरोप था कि उनके पिता की दो एलआईसी पॉलिसियों के मृत्यु दावा भुगतान को लेकर विवाद था। आरोप था कि 30 जून 2014 को बैजनाथ राय सह-आरोपियों के साथ उनके घर पहुंचे और धमकी दी। पुलिस जांच के बाद मामले में अंतिम प्रपत्र दाखिल कर बैजनाथ राय को आरोपित नहीं किया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विरोध-सह-शिकायत याचिका दाखिल की, जिस पर अदालत ने धारा 323 और 448 के तहत संज्ञान लिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 448 के तहत अपराध के लिए आरोपी का घर में प्रवेश या वहां बने रहना किसी अपराध को करने अथवा किसी व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या परेशान करने की मंशा से होना जरूरी है। इस मामले में बैजनाथ राय का प्रवेश वैध था और उनके अवैध रूप से घर में रुके रहने का कोई आरोप नहीं है।
वहीं, मारपीट के आरोप पर अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के शपथ बयान में बैजनाथ राय द्वारा चोट पहुंचाने का कोई उल्लेख नहीं है। धक्का देने और चोट लगने का आरोप सह-आरोपी पर था। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध तथ्यों से धारा 323 और 448 के अपराध नहीं बनते। ऐसे में कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। अदालत ने पूरी आपराधिक कार्यवाही बैजनाथ राय के खिलाफ निरस्त कर दी।

