Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्रीय मनोरोग संस्थान (सीआईपी), कांके की बहुमूल्य भूमि से अतिक्रमण हटाने के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की निष्क्रियता पर तीखी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला है कि सरकारी संपत्तियों के संरक्षक माने जाने वाले अधिकारी गहरी नींद में सोए रहे और उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की पहल पर जागना पड़ा, जो बिहार का निवासी है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को इस गंभीर मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण की सुनवाई किसी अन्य अदालत या प्राधिकरण द्वारा नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। यह जनहित याचिका बिहार निवासी विकास उर्फ गुड्डू बाबा द्वारा दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने 19 नवंबर 2025 के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि सीआईपी की भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी और दो सप्ताह के भीतर सीमांकन कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। हालांकि, भूमि सुधार उप समाहर्ता के शपथपत्र से सामने आया कि सीआईपी के वास्तविक कब्जे में केवल 229.29 एकड़ भूमि है, जबकि संस्थान के अनुसार उसकी कुल भूमि 376.222 एकड़ है। लगभग 147 एकड़ भूमि का कोई स्पष्ट विवरण नहीं मिलने से बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की आशंका गहरा गई है। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि शपथपत्र में केवल मुख्य गेट के पास अतिक्रमण हटाने की बात कही गई है, जबकि अन्य अतिक्रमणों को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। अदालत ने इसे अपने आदेशों के प्रति गंभीर लापरवाही करार दिया।

