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Court News: घर जलाने के मामले में सपा विधायक Irfan Solanki को सात साल सजा, गई विधायकी

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Court News: जाजमऊ आगजनी के मामले में एमपी एमएलए सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को सीसामऊ से सपा विधायक इरफान सोलंकी (Irfan Solanki) उनके भाई रिजवान सोलंकी समेत पांच को सात साल कैद की सजा सुनाई है। विधायक और उनके भाई पर 30,500 और अन्य तीन आरोपितों पर 29,500 का अर्थदंड लगाया है।

अर्थदंड न देने पर विधायक व उनके भाई को 11 महीने 15 दिन और अन्य तीन अभियुक्तों को 10 महीने 15 दिन की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। जेल में बिताए गए समय को सजा में जोड़ा जाएगा। सजा सुनाए जाने के बाद विधायक की सदस्यता भी चली गई है। यूपी विधानसभा से जल्द विधानसभा सीट सीमामऊ को रिक्त घोषित किया जाएगा और उपचुनाव भी कराया जाएगा। 349 पन्ने के फैसले में कोर्ट ने 21 गवाहों की गवाही को महत्वपूर्ण तथ्य माना। बचाव पक्ष अब हाईकोर्ट में अपील करेगा। दो साल से ज्यादा की सजा होने की वजह से इरफान की विधायकी जाना तय है।

2022 में आगजनी के मामले में आरोपी

महराजगंज जेल में वीडियो क्रॉन्फ्रेंसिंग से पेशी के दौरान फैसला सुन इरफान मायूस हो गए। डिफेंस कॉलोनी जाजमऊ में 7 नवम्बर 2022 को नजीर फातिमा के घर में आगजनी हुई थी। इस मामले में पहले पीड़िता ने विधायक इरफान सोलंकी और उनके भाई रिजवान पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना में शौकत अली, इसराइल आटेवाला और मोहम्मद शरीफ का नाम शामिल किया गया था। पुलिस ने पहले विधायक और उनके भाई उसके बाद अन्य तीन के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। 10 बार फैसला टलने के बाद कोर्ट ने पांचों आरोपितों को 3 जून 2024 को दोषी पाया था। शुक्रवार शाम पौने सात बजे विधायक समेत पांचों आरोपितों को सजा सुना दी।

हम दोनों भाई बेगुनाह हैं रिजवान

कोर्ट से जेल जाते वक्त रिजवान सोलंकी ने कहा कि हम दोनों भाई बेगुनाह हैं। सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश के साथ हैं और उनके साथ ही रहेंगे। फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। गलत तरीके से विधायकी ली गई है। इसको दोबारा हासिल करेंगे।

सात विधायक सदस्यता खो चुके

कानपुर की सीसामऊ विधानसभा से विधायक इरफान सोलंकी को आपराधिक मामले में सात साल की सजा के फैसले के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता जाना तय है। सदस्यता खोने का यह कोई पहला मामला नहीं है। देश में लोक जनप्रतिनिधित्व कानून के आने के बाद से इरफान समेत अब तक यूपी के सात विधायकों और दो सांसदों को अपना पद गंवाना पड़ा है। इसका कारण 10 जुलाई 2013 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिली थॉमस बनाम भारत संघ मामले में एक बड़ा फैसला माना जाता है।

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Devesh Ananad

देवेश आनंद को पत्रकारिता जगत का 15 सालों का अनुभव है। इन्होंने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान में काम किया है। अब वह इस वेबसाइट से जुड़े हैं।

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