लंबे समय से गवाही नहीं होने पर हाईकोर्ट सख्त, मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने का आदेश
Ranchi News: जमानत याचिका खारिज करने के साथ झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के एक आपराधिक मामले के लंबित ट्रायल को तेजी देने के लिए पुलिस अधीक्षक को सीधे जिम्मेदारी सौंपी है। केरेडारी थाना कांड में आरोपी शिव शंकर कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने हजारीबाग एसपी को शेष तीन गवाहों की गवाही दो माह के भीतर सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने अदालत को बताया कि मुकदमे में अब केवल तीन गवाहों की गवाही बाकी है, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इस पर अदालत ने गवाहों की अनुपस्थिति को मुकदमे की प्रगति में बाधा मानते हुए एसपी को हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट अगली तारीख शीघ्र तय करे और इसकी पूर्व सूचना हजारीबाग एसपी को दी जाए। एसपी यह सुनिश्चित करेंगे कि उस तारीख से दो माह के भीतर शेष तीनों अभियोजन गवाह अदालत में उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराएं।
जमानत के बजाय मुकदमा जल्द पूरा कराने पर जोर
आरोपी शिव शंकर कुमार की ओर से जमानत के लिए प्राथमिकी, दस्तावेज, चोट प्रतिवेदन और पीडब्ल्यू-1 तथा पीडब्ल्यू-2 की गवाही को भी अदालत के समक्ष रखा गया। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक शशि कुमार वर्मा ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने सभी सामग्रियों पर विचार करने के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी की जमानत याचिका पहले खारिज हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने मुकदमे को अनावश्यक रूप से लंबा खिंचने से रोकने के लिए लंबित तीन गवाहों की गवाही पूरी कराने पर जोर दिया।
गवाही पूरी होते ही निपटाने का निर्देश
मामला केरेडारी थाना कांड संख्या 105/2025 से संबंधित है और हजारीबाग के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत में लंबित है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि तीनों गवाहों की गवाही दर्ज होने के बाद ट्रायल कोर्ट मामले का यथासंभव शीघ्र निपटारा करे।
खास बात यह रही कि अदालत ने गवाहों को पेश कराने की जिम्मेदारी महज पुलिस स्तर पर छोड़ने के बजाय हजारीबाग एसपी को समय-सीमा के साथ इसकी निगरानी का निर्देश दिया।

