Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने 382 दिन की देरी से दायर राज्य सरकार की एलपीए स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार देरी का कोई पर्याप्त और संतोषजनक कारण नहीं बता सकी। इसके साथ ही विलंब माफी की अंतरिम अर्जी (आईए) खारिज कर दी गई और परिणामस्वरूप एलपीए भी समाप्त हो गई। मामला 26 जून 2024 को एकल पीठ द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर अपील से जुड़ा था। राज्य सरकार ने देरी के लिए कानूनी राय लेने, फाइलों के विभिन्न विभागों में भेजे जाने और प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला दिया। हालांकि खंडपीठ ने कहा कि आवेदन में केवल घटनाओं की तारीखें गिनाई गई हैं, लेकिन यह नहीं बताया गया कि अलग-अलग चरणों में महीनों तक देरी क्यों हुई।
अदालत ने पाया कि एकल पीठ के आदेश के बाद करीब पांच महीने तक विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके बाद भी फाइल विभिन्न कार्यालयों में लंबे समय तक लंबित रही, जिसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। न्यायालय ने इसे सरकारी तंत्र की लापरवाही और उदासीनता का उदाहरण बताया। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल सरकारी विभाग होने के आधार पर देरी माफ नहीं की जा सकती। कानून की समय-सीमा सरकार पर भी समान रूप से लागू होती है। अदालत ने कहा कि लंबी और अस्पष्ट देरी से निजी पक्षकारों को अनिश्चितकाल तक मुकदमेबाजी में नहीं रखा जा सकता। पर्याप्त कारण नहीं होने के कारण विलंब माफी की अर्जी और उसके साथ दायर अपील दोनों खारिज कर दी गईं।

