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HC News: पाकुड़ में तालाब पाटकर बनाए मकान पर चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर हस्तक्षेप से किया इनकार

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By CourtNews Desk On 28 Jul, 2026
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Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने पाकुड़ जिले में तालाब की जमीन पर बने मकान के ध्वस्तीकरण (Demolition) पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि हाईकोर्ट की ही एक अन्य समवर्ती पीठ (Coordinate Bench) द्वारा तालाब के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में दिए गए आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करना न्यायिक मर्यादा (Judicial Impropriety) के खिलाफ होगा। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने अवगत कराया कि अवमानना की तलवार लटकने के कारण प्रशासन आज ही निर्माण को ध्वस्त करने वाला है, तब हाईकोर्ट ने मामले को खारिज करते हुए तुरंत आदेश की प्रति याचिकाकर्ता के वकील को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा मामला?

  • मामले की पृष्ठभूमि: पाकुड़ Town के बैंक कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पाकुड़ प्रशासन (उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी और अंचल अधिकारी) द्वारा भेजे गए डिमोलिशन (ध्वस्तीकरण) नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी।
  • तालाब से जुड़ी जमीन: याचिकाकर्ता का दावा था कि जिस जमीन पर मकान बना है, वह उसकी रैयती (निजी) संपत्ति है और उसने स्वयं वहां तालाब का निर्माण कराया था, जिसे बाद में पाटकर मकान में तब्दील किया गया।
  • प्रशासनिक कार्रवाई: प्रशासन पूर्व में पारित अदालती आदेश [W.P.(C) No. 726 of 2015] का अनुपालन करते हुए निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई कर रहा था।
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हाईकोर्ट का रुख और मुख्य बिंदु

  1. पूर्व आदेश का हवाला (W.P.(C) No. 726/2015):कोर्ट ने उल्लेख किया कि वर्ष 2015 के एक अन्य मामले (मो. मंसूर अली एवं अन्य बनाम झारखंड सरकार) में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि प्रश्नगत भूमि को पुनः तालाब/पोखर के रूप में बहाल किया जाए और संताल परगना टेनेंसी एक्ट (SPT Act) की धारा 35 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना इसका उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए न होने दिया जाए।
  2. एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप संभव नहीं:जस्टिस आनंद सेन ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता वर्ष 2015 के मामले में पक्षकार (Party) नहीं था, फिर भी इस स्तर पर स्टे (रोक) देने से पूर्व में दिए गए अंतिम आदेश का उल्लंघन होगा। एक ही अदालत की एकल पीठ द्वारा दूसरी एकल पीठ के अंतिम आदेश को निष्प्रभावी करना न्यायिक अनुचितता होगी।
  3. वैकल्पिक कानूनी रास्ते उपलब्ध:अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को ऐसे आदेश से शिकायत है जिसमें उसे पक्षकार नहीं बनाया गया था, तो वह अदालत की अनुमति (Leave of the Court) लेकर उस आदेश के खिलाफ अपील (Appeal) दायर कर सकता है। याचिकाकर्ता के पास अन्य कानूनी विकल्प खुले हैं।
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