अदालत ने कहा: कानूनी सीमा खत्म होने से पहले नीलामी अवैध; वाहन मालिक को मुआवजा देने और ट्रक लौटाने का निर्देश
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार जिला प्रशासन और खनन विभाग की जल्दबाजी और लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने फैसला सुनाया है कि रिवीजन (पुनरीक्षण) की वैधानिक समय-सीमा (60 दिन) समाप्त होने से पहले जब्त वाहन को नीलाम करना पूरी तरह गैर-कानूनी और मनमाना है। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को हुई मानसिक व आर्थिक परेशानी के एवज में राज्य सरकार/प्रतिवादियों को 3 लाख रुपये का हर्जाना (कॉस्ट) भरने और नीलाम किया गया ट्रक (हाईवा) तुरंत वापस करने का आदेश दिया है।
क्या था मामला?
गया (बिहार) निवासी अशोक सिंह का ट्रक (रजिस्ट्रेशन नंबर OD-09P-3039) वर्ष 2021 में बालूमाथ पुलिस ने अवैध कोयला ढुलाई के आरोप में जब्त किया था। लातेहार के उपायुक्त सह जिला मजिस्ट्रेट ने 25 फरवरी 2023 को वाहन को जब्त (Confiscate) कर 8 सप्ताह के भीतर नीलाम करने का आदेश दिया। कानून (JMMC रूल्स, 2004 के नियम 62) के तहत वाहन मालिक को इस आदेश के खिलाफ 60 दिनों (26 अप्रैल 2023 तक) के भीतर खान आयुक्त (Mines Commissioner) के समक्ष रिवीजन दाखिल करने का अधिकार था। ट्रक मालिक ने समय रहते 22 मार्च 2023 को ही रिवीजन दाखिल कर दिया था। लेकिन, जिला प्रशासन ने 60 दिन की कानूनी अवधि खत्म होने का इंतजार किए बिना, महज कुछ ही दिनों में 08 मार्च 2023 को ही ट्रक की नीलामी कर दी और इसे भोला सिंह नामक व्यक्ति को 20.78 लाख रुपये में बेच दिया।
खान आयुक्त ने रद्द किया था जब्ती का आदेश
बाद में, खान आयुक्त (रांची) ने 16 मई 2025 को याचिकाकर्ता का रिवीजन स्वीकार करते हुए उपायुक्त के जब्ती आदेश को रद्द कर दिया और नियमानुसार पेनाल्टी/रॉयल्टी लेकर वाहन छोड़ने का निर्देश दिया। लेकिन जब ट्रक मालिक गाड़ी लेने पहुंचे, तो पता चला कि गाड़ी तो दो साल पहले ही नीलाम हो चुकी है। इसके बाद ट्रक मालिक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
- सच्चा नोटिस नहीं दिया गया: हाईकोर्ट ने माना कि नीलामी से पहले ट्रक मालिक को कोई व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिया गया था। केवल अखबार में सामान्य इश्तेहार छाप देना सही सूचना नहीं माना जा सकता।
- संवैधानिक अधिकार का हनन: अदालत ने कहा कि संपत्ति का अधिकार एक संवैधानिक अधिकार है और किसी को भी बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के उसकी संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता।
- हर्जाना और वाहन वापसी: कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर ट्रक याचिकाकर्ता को सौंपने और 3,00,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
नीलामी में गाड़ी खरीदने वाले (इंटरवेनर) का क्या हुआ?
नीलामी में गाड़ी खरीदने वाले भोला सिंह ने दावा किया कि उसने 20.78 लाख रुपये में गाड़ी खरीदी और उसे ठीक कराने में 22.50 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च किए। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने उससे गाड़ी वापस ली और ब्याज सहित कुल 26.57 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। हाईकोर्ट ने इस राशि को प्रथम दृष्टया उचित माना और स्पष्ट किया कि यदि गाड़ी मालिक या नीलामी खरीदार और अधिक मुआवजे का दावा करना चाहते हैं, तो वे सिविल कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

