झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- “जब तक सरकार आधिकारिक गजट में तारीख अधिसूचित नहीं करती, तब तक नियमावली कानूनी रूप से प्रभावी नहीं मानी जा सकती; बिना अधिकार क्षेत्र के लिया गया फैसला शून्य”
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (JIADA), आदित्यपुर क्षेत्र द्वारा जमीन आवंटन रद्द करने और लीज डीड समाप्त करने के आदेश को पूरी तरह अवैध और क्षेत्राधिकार से बाहर (Without Jurisdiction) बताते हुए खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने ‘फोरम इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक सरकार किसी नियम या रेगुलेशन को लागू करने की निश्चित तिथि गजट में अधिसूचित नहीं करती, तब तक उसके तहत की गई कोई भी कार्रवाई कानूनी रूप से शून्य (Nullity) मानी जाएगी.
क्या था पूरा मामला?
प्राधिकरण (तत्कालीन AIADA) ने वर्ष 2006 में आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में एक आधुनिक ‘सिटी सेंटर’ (स्टार होटल, मॉल, मल्टीप्लेक्स, मेडिकल सेंटर आदि) विकसित करने के लिए निविदा आमंत्रित की थी. सफल बोलीदाता बनने के बाद याचिकाकर्ता कंपनी ‘फोरम इंफ्रास्ट्रक्चर’ का गठन हुआ और उसे 26 मार्च 2007 को 90 साल की लीज पर 21.698 एकड़ भूमि आवंटित की गई. परंतु, तय समय-सीमा (36 महीने) के भीतर निर्माण कार्य पूरा न होने और विभिन्न प्रशासनिक व पर्यावरणीय मंजूरियों में हुई देरी के कारण, JIADA के क्षेत्रीय निदेशक (Regional Director) ने 27 अक्टूबर 2021 को एक आदेश जारी कर कंपनी का आवंटन रद्द कर दिया, लीज डीड समाप्त कर दी और जमा राशि को जब्त कर लिया था. याचिकाकर्ता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
अदालत में फंसा ‘क्षेत्राधिकार’ का कानूनी पेंच
याचिकाकर्ता के वकील मिस्टर इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत में दलील दी कि जिस “JIADA रेगुलेशन, 2016” के तहत क्षेत्रीय निदेशक ने आवंटन रद्द करने की कार्रवाई की, वह नियमावली वास्तव में उस तिथि तक कानूनी रूप से लागू ही नहीं हुई थी.
नियमावली की धारा 1.1 (iv) के अनुसार, यह रेगुलेशन उस तारीख से लागू होना था जिसे राज्य सरकार आधिकारिक गजट (Official Gazette) में अधिसूचना जारी कर विशेष रूप से तय करती. अदालत द्वारा बार-बार मांगे जाने के बावजूद JIADA का विधि तंत्र ऐसी किसी भी अधिसूचना (Notification) को रिकॉर्ड पर पेश करने में पूरी तरह विफल रहा, जिससे यह साबित हो सके कि सरकार ने इस नियमावली को प्रभावी करने की कोई तिथि घोषित की थी.
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और कानूनी निष्कर्ष:
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पूर्व के न्यायिक उदाहरणों (जैसे प्रबंध निदेशक, RIADA बनाम मेसर्स नैरो स्ट्रक्चर्स) का हवाला देते हुए निम्नलिखित बिंदु स्पष्ट किए:
- शून्य घोषित हुआ आदेश: हाईकोर्ट ने माना कि जब तक कोई अधीनस्थ कानून (Subordinate/Delegated Legislation) सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर प्रभावी नहीं किया जाता, तब तक उसके तहत किसी अधिकारी को कोई शक्ति नहीं मिलती.
- गजट प्रकाशन केवल औपचारिकता नहीं: अदालत ने स्पष्ट किया कि 29 अक्टूबर 2021 को रेगुलेशन का गजट में महज छप जाना ही पर्याप्त अनुपालन नहीं है, क्योंकि उसमें लागू होने की किसी विशिष्ट ‘नियत तिथि’ का उल्लेख नहीं था.
- बैकडेट से लागू नहीं हो सकता नियम: रद्द करने का आदेश 27 अक्टूबर 2021 को पारित हुआ, जबकि रेगुलेशन का प्रकाशन दो दिन बाद 29 अक्टूबर 2021 को हुआ. कोई भी प्रशासनिक आदेश पिछली तारीख (Retrospective effect) से क्षेत्राधिकार की कमी को वैध नहीं कर सकता.
अदालत का अंतिम आदेश:
इन आधारों पर हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय निदेशक द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस और 27 अक्टूबर 2021 के लीज रद्दीकरण आदेश को पूरी तरह ‘गैर-कानूनी’ और ‘शून्य’ करार देते हुए रद्द कर दिया है.

