विवाद: अध्यक्ष और सचिव के बीच वित्तीय अनियमितताओं का मामला, अदालत ने कहा- यह ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में
हस्तक्षेप: खंडपीठ ने बदला सिंगल बेंच का आदेश, पूर्व में एकल पीठ ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए खारिज की थी याचिका
- एक-दूसरे पर आरोप: संस्था के अध्यक्ष और सचिव के बीच वित्तीय लेन-देन एवं अस्पताल के संचालन को लेकर चल रहा है गंभीर विवाद।
- चीफ जस्टिस की पीठ का फैसला: चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनाया आदेश।
Ranchi News: अंजुमन इस्लामिया अस्पताल एवं सोशल सर्विस सोसायटी में अध्यक्ष और सचिव के बीच वित्तीय अनियमितताओं और वर्चस्व को लेकर चल रहे लंबे विवाद का समाधान अब वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल करेगा। झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पूरे केस को वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल के पास हस्तांतरित (Transfer) कर दिया है। साथ ही ट्रिब्यूनल को कड़ा निर्देश दिया है कि वह दोनों पक्षों को सुनकर अगले दो महीने के भीतर इस पूरे विवाद का अंतिम रूप से निपटारा करे।
एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील
मामला अंजुमन इस्लामिया के आंतरिक प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और संस्था के संचालन से जुड़ा है, जहां दोनों पदाधिकारी एक-दूसरे पर वित्तीय दोहन और भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले संस्था के सचिव ने हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर कर कोर्ट से दखल की मांग की थी, लेकिन एकल पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि यह विवाद टाइटल सूट (Title Suit) या संबंधित रजिस्ट्रार के समक्ष सुलझाया जाना चाहिए।
खंडपीठ ने तय किया अधिकार क्षेत्र: सिंगल बेंच के इस आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ में एलपीए (अपील) दायर की गई थी। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली खंडपीठ ने माना कि वक्फ संपत्तियों और उससे जुड़ी संस्थाओं के विवादों को सुनने का पहला और असली अधिकार वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल को ही है, इसलिए इसे वहां भेजा जा रहा है।

