Ranchi News: रांची के नामकुम अंचल में बड़े पैमाने पर हुई कथित भूमि की अवैध खरीद-बिक्री और सरकारी राजस्व अभिलेखों (सरकारी दस्तावेजों) में हेरफेर और जालसाजी के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। हालांकि, इस मामले में संलिप्त दागी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ औपचारिक रूप से पीई (प्रारंभिक जांच/Preliminary Enquiry) दर्ज करने की अनुमति राज्य सरकार के स्तर से अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से यह जानकारी हाईकोर्ट को दी गई।
हाईकोर्ट का सख्त रुख:
एसीबी का पक्ष सुनने के बाद जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भूमि राजस्व विभाग के प्रधान सचिव को इस मामले में नया पक्षकार (Respondent) बनाने का निर्देश दिया है। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद करेगी।
क्या है नामकुम अंचल का यह विवाद?
- गायब दस्तावेज: झारखंड हाईकोर्ट ने थॉमस साइमन साइरिल हंस की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पूर्व में पाया था कि नामकुम अंचल कार्यालय से कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज और फाइलें गायब हैं या नहीं मिल रही हैं। इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व में एसीबी को पूरे मामले की जांच करने का जिम्मा सौंपा था।
- म्यूटेशन में गड़बड़ी: याचिकाकर्ता का आरोप है कि नामकुम अंचल के अंतर्गत आने वाले डुंडु क्षेत्र में स्थित एक विवादित भूमि के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) प्रकरण में अंचल कार्यालय द्वारा जानबूझकर मूल अभिलेख (Original Records) उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं और सरकारी दस्तावेजों में बड़े स्तर पर हेरफेर की गई है।
- सरकार की अनुमति का पेंच: शुक्रवार को एसीबी ने कोर्ट को बताया कि प्रथम दृष्टया अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए उन्होंने संबंधित दोषी अधिकारियों के खिलाफ अपनी प्रारंभिक पड़ताल पूरी कर ली है, लेकिन नियमतः राज्य सरकार से आधिकारिक अनुमति (PE दर्ज करने हेतु) मिलना अभी बाकी है।

