Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने कर्मचारी हितों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सेवा पुस्तिका (Service Book) नियोक्ता (Employer) के कार्यालय में रखी जाने वाली एक आधिकारिक और गोपनीय दस्तावेज होती है। इसलिए, केवल सेवा पुस्तिका उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर किसी भी कर्मचारी को उसकी प्रोन्नति (प्रमोशन) और वित्तीय लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह निर्देश याचिकाकर्ता जनक कुमारी सिन्हा द्वारा दाखिल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया और इसके साथ ही मामले को निष्पादित (Dispose) कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता जनक कुमारी सिन्हा की नियुक्ति 25 अगस्त 1981 को लैब-इन-चार्ज के रूप में हुई थी और वह 31 जनवरी 2007 को सेवानिवृत्त (Retire) हो चुकी हैं।
- प्रमोशन और विवाद: रांची विश्वविद्यालय ने 6 फरवरी 2016 को एक अधिसूचना जारी कर उन्हें 1 अगस्त 2000 के प्रभाव से ‘डिमांस्ट्रेटर’ के पद पर प्रोन्नति दी थी। हालांकि, वेतन संशोधन के बाद भी उन्हें उचित वेतनमान और वित्तीय लाभ नहीं दिए गए।
- विश्वविद्यालय की दलील: कोर्ट में विश्वविद्यालय ने तर्क दिया कि पदोन्नति के समय पैसों के समायोजन (Adjustment) के दौरान अभिलेखों (Records) में याचिकाकर्ता की सर्विस बुक की फोटोकॉपी उपलब्ध नहीं थी, इसलिए उन्हें लाभ नहीं दिया गया।
- विवाद की वजह: इसके बाद विभाग ने 6 फरवरी 2024 को एक पत्र जारी कर जनक कुमारी को पहले दी जा चुकी पदोन्नति को निरस्त (Cancel) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिसे याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और आदेश
हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय की दलीलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सेवा पुस्तिका जैसा महत्वपूर्ण दस्तावेज हमेशा नियोक्ता के पास सुरक्षित रहता है, इसलिए इसे आधार बनाकर लाभ रोकना कानून की नजर में टिकने योग्य नहीं है।
समानता का सिद्धांत (Principle of Equality): अदालत ने कहा कि यदि समान स्थिति और पद वाले अन्य कर्मचारियों को पहले ही इन लाभों का भुगतान किया जा चुका है, तो समानता के सिद्धांत के तहत याचिकाकर्ता के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाना आवश्यक है।
समय-सीमा के भीतर कार्रवाई का निर्देश:
अदालत ने रांची विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को 6 फरवरी 2024 के शो-कॉज (कारण बताओ) नोटिस के संबंध में निम्नलिखित समय-सीमा तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है:
| प्राधिकरण (Authority) | निर्धारित कार्य | दी गई समय-सीमा |
| रांची विश्वविद्यालय | यदि अब तक कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया है, तो वह अपना स्पष्टीकरण सौंपे। | 04 सप्ताह के भीतर |
| राज्य सरकार | विश्वविद्यालय के जवाब और मामले के तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय ले। | 12 सप्ताह के भीतर |

