Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने अभियंत्रण सेवा से जुड़े नियमों में देरी और लापरवाही पर राज्य की नौकरशाही को कड़े शब्दों में फटकार लगाई है। खंडपीठ ने कहा कि झारखंड इंजीनियरिंग सर्विस रूल्स, 2016 की वैधता और संशोधन पर वर्षों से ठोस पहल न होने के कारण पथ निर्माण, जल संसाधन और पेयजल विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति और पदोन्नति लगभग ठप पड़ी हुई है। अदालत ने कहा कि 2016 के बाद से भर्ती और प्रोन्नति के स्पष्ट नियम न होने को “लेथार्जिक अप्रोच” यानी घोर प्रशासनिक सुस्ती माना जाएगा। इससे जुड़े दाखिल 13 रिट याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। जिनमें इंजीनियरिंग कैडर के अधिकारियों ने संशोधित नियमों को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की खंडपीठ में हुई।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि बार-बार मसौदा नियम विधि, वित्त, कार्मिक और मंत्रिमंडल सचिवालय में अटकना वरिष्ठ अधिकारियों की कानूनी समझ और दूरदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अदालत ने “प्रभार” और “करेंट प्रभार” के आधार पर इंजीनियरिंग विभागों को चलाने की व्यवस्था को गुड गवर्नेंस के विपरीत बताया और कहा कि सहायक अभियंताओं को अधीक्षण अभियंता का पदभार सौंपना व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। न्यायालय ने राज्य सरकार को चौथी बार समय देने से इंकार करते हुए दो सप्ताह में संशोधित नियमों को अंतिम रूप देकर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 19 दिसंबर निर्धारित की है। आदेश में यह भी कहा गया है कि देरी होने पर संबंधित सचिवों और प्रधान सचिवों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सेवानिवृत्त न्यायाधीश अताउर रहमान मसूदी, अधिवक्ता समीर सौरभ तथा शादाब इक़बाल उपस्थित रहे।

